जानें- लाइम रोग के खतरनाक लक्षण, कारण, इलाज ओर बचाव की जानकारी। (Symptoms, Causes, Treatment and Prevention of Lyme disease)

नमस्कार, दोस्तों आज हम लाइम रोग के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी पर प्रकाश डालेंगे। आज हम लाइम रोग के खतरनाक लक्षण, कारण, इलाज ओर बचाव की जानकारी साझा करेंगे। इस पोस्ट में हम जानेंगे की कैसे आप स्वयं को इस गंभीर बीमारी से बचा सकते हैं। जो आपके दिल ओर दिमाग पर खतरनाक असर डालती है। साथ ही यह आपके तंत्रिका तंत्र (Nervous system) को भी गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं।

लाइम रोग का इतिहास

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1970s में अमेरिका में कई बच्चों में arthritis जैसे लक्षण दिखे, जिनकी जाँच करने पर Lyme Disease के होने का पता चला। 1918 में सर्वप्रथम डॉ. Willy Burgdorfer ने Lyme Disease होने का कारण बनने वाले बैक्टीरिया Borrelia burgdorferi को खोजा। जिस कारण इस जीवाणु का नाम उनके सम्मान में उनके नाम पर “Borrelia burgdorferi” रखा गया, तत्पश्चात इस बीमारी को “Lyme Disease” नाम दिया गया।

लाइम रोग क्या है? (What is Lyme Disease) ?

Lyme Disease एक प्रकार का जीवाणु संक्रमण (Bacterial Infection) है।  जिसे लाइम बोरेलिओसिस (Lyme Borreliosis) के रूप में भी जाना जाता है। यह एक प्रकार के कीड़े यानी Tick के काटने से होने वाला संक्रमण है। जो मुख्यत: बोरेलिया बर्गडॉर्फेरी (Borrelia burgdorferi) नामक बैक्टीरिया से फैलता है। यह मुख्य रूप से Joints, Heart, Skin ओर आपके Nervous system को प्रभावित करता है।

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यह आमतौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के अधिकांश हिस्सों में पाया जाता है। ये टिक्स ज्यादातर जंगलों, घास वाले इलाकों और जानवरों की त्वचा पर पाए जाते हैं। तथा बसंत, ग्रीष्म और पतझड़ के मौसम में इनसे संक्रमित होने की अधिक संभावना होती है। क्योंकि इस समय पर इनकी मात्रा अधिक बढ़ जाती है। इसलिए इस समय पर इनसे संक्रमित होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

अगर बात करें संक्रमण के फैलने की। तो इस स्थिति में शोधकर्ताओं ने पाया कि, किसी इंसान को संक्रमित करने के लिए इस टिक (tick) का कम से कम 24 से 36 घंटे तक इंसान की त्वचा से चिपके रहना ज़रूरी है।  
CDC के अनुसार , 24 घंटे के अंदर टिक को हटाने से लाइम रोग का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

Table of Contents

लाइम रोग के कारण ओर लक्षण (Lyme Disease Causes and Symptoms)

इस पोस्ट में हमने लाइम रोग के खतरनाक लक्षण, कारण, इलाज ओर बचाव की जानकारी पर प्रकाश डाला हैं। ताकि आप लोग समय से इस रोग के लक्षण, कारण, इलाज ओर बचाव के बारे में बारीकी से जान पाए, और समय पर इलाज कर इस खतरनाक बीमारी से खुद को ओर अपने परिवार को बचा पाये।

लाइम रोग के खतरनाक लक्षण, कारण, इलाज ओर बचाव की जानकारी।

लाइम रोग के खतरनाक लक्षण, कारण, इलाज ओर बचाव की जानकारी।

लाइम रोग के कारण

अगर बात करें कि आखिर किन कारणों से यह बीमारी इंसान को ग्रसित करती हैं। तो आप को बता दें। की –

लाइम रोग एक छोटे से कीड़े के काटने से होता हैं। जिसे (Tick) कहा जाता हैं। इसे (Black-leg-tick) या “हिरण टिक” भी कहा जाता है। टिक (Tick) की लंबाई आमतौर पर 3 से 5 मिमी (लगभग 1/8 से 1/4 इंच) होती है। ओर यह 2 से 3 साल तक जीवित रह सकता है।

यह टिक एक बैक्टीरिया को इंसान के शरीर में छोड़ता हैं। जिस बोरेलिया बर्गडॉर्फेरी (Borrelia burgdorferi) के नाम से जाना जाता हैं। जब यह टिक किसी इंसान को काटता है। तब ये बैक्टीरिया टिक के अंदर मौजूद होता है। जो लार के माध्यम से इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाता है। और खून में मिलकर व्यक्ति को बीमार कर देता है।

लाइम रोग के लक्षण

लाइम रोग के लक्षण Tick के काटने के तीन दिन बाद ही आने शुरू हो जाते हैं। शुरुआती चरण में आमतौर पर बुखार, थकान, सिर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जो अकसर वायरल इन्फेक्शन जैसे लगते हैं इसलिए लोग इसे नजर अंदाज कर देते हैं। लाइम रोग के लक्षण उसके चरण के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

लाइम रोग के चरण (Stage of Lyme Disease)

आमतौर पर Lyme Disease के तीन चरण होते है।

प्रथम चरण: प्रारंभिक स्थानीयकृत चरण (Early Localized Stage)

लाइम रोग के शुरुआती लक्षण आमतौर पर (3 से 30 दिनों) के भीतर दिखाई देते हैं। रोग के इस चरण में सीमित लक्षण दिखाई देते हैं। इसे प्रारंभिक स्थानीयकृत चरण कहते हैं। टिक के काटने के बाद शरीर पर एक गोलाकार लाल चकते का बनना शामिल हैं ,जो “बुल्स-आई” (Bull’s-eye) के नाम से जाना जाता है, ये टिक के काटने के आसपास दिखाई देता है।

हालाँकि, यह सभी मामलों में मौजूद नहीं होता है और हमेशा बुल्स-आई जैसा नहीं दिखता – कभी-कभी यह बस एक फैलता हुआ लाल दाने (Red Rash) जैसा होता है। लेकिन ये दाने हर मरीज में नहीं दिखाई देते। इस दाने को एरिथेमा माइग्रेंस (Erythema migransके नाम से जाना जाता है। ये दाने लाइम रोग (Lyme Disease) का एक सामान्य लक्षण होते हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता हैं। अकसर ये दाने गर्म महसूस हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें खुजली या दर्द नहीं होता हैं। और अगर इनका समय पर इलाज न किया जाए तो ये ठीक होने में चार सप्ताह तक का समय ले सकते है। 

प्रारंभिक चरण में निम्न लक्षण शामिल हो सकते हैं:

  • बुखार और ठंड लगना
  • अत्यधिक थकान
  • सिरदर्द और गर्दन में अकड़न
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द

दूसरा चरण: प्रारंभिक प्रसार चरण (Early Disseminated Stage)

समय पर उपचार न करने पर लाइम रोग एक भयानक रूप ले लेता हैं। टिक के काटने के लगभग (3 से 12) हफ़्तों के अंदर दूसरे चरण के लक्षण दिखाई देते हैं। इस समय पर (बोरेलिया बर्गडॉर्फेरी) नामक बैक्टीरिया खून के द्वारा व्यक्ति के पूरे शरीर में फैल जाता हैं। चरण 2 अकसर ज्यादा गंभीर और विस्तृत हो सकते हैं। इसे प्रारंभिक प्रसार चरण कहा जाता हैं।

  • ठंड लगना, बुखार, सिर दर्द तथा थकान
  • शरीर पर दानों का निकलना।
  • चक्कर आना, बेहोशी, साँस लेने में तकलीफ़
  • दृष्टि परिवर्तन “डिप्लोपिया”, दोहरी दृष्टि
  • चेहरे का पक्षाघात होना, बेल्स पाल्सी (Bell’s Palsy)
  • वर्टिगो और चक्कर आना
  • “न्यूरोबोरेलिओसिस”, तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं
  • याददाश्त कमजोर होना।
  • लाइम कार्डिटिस, हृदय संबंधी समस्याएं, सीने में दर्द, दिल की धड़कन का असामान्य हो जाना।

तीसरा चरण: देर से प्रसारित चरण (Late Disseminated Stage)

यदि रोगी लाइम रोग का शुरुआती दो चरणों में तुरंत या प्रभावी ढंग से इलाज नहीं कराता है, तो लाइम संक्रमण का देर से फैलने वाला तीसरा चरण टिक के काटने के लगभग 6 महीने से लेकर कई वर्षों तक हो सकता है। इस स्थिति में (जीवाणु संक्रमण) पूरे शरीर में होता हुआ, तंत्रिका तंत्र तक पहुंच चुका होता है। और बिना उपचार के रोगियों में (क्रोनिक लाइम) गठिया के साथ-साथ तंत्रिका संबंधी और हृदय संबंधी लक्षणों का खतरा बढ़ जाता हैं। ऐसे में रोगी को संक्रमण के आख़िरी चरणों में लाइम रोग अधिक भयानक स्थिति का सामना करना पड़ सकता हैं।

  • गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन
  • चक्कर आना, सिर चकराना
  • अनिद्रा, गंभीर थकान
  • हाथों और पैरों का सुन्न हो जाना।
  • तंत्रिका संबंधी समस्याएं: ,स्मृति हानि (याददाश्त की समस्या), भ्रम (मानसिक भटकाव), दौरे
  • रुमेटोलॉजिकल: गंभीर जोड़ों का दर्द (गठिया)
  • हृदय संबंधी: अनियमित हृदय गति, क्षणिक हृदय अवरोध
  • गर्दन में अकड़न, मांसपेशियों या जोड़ों में गंभीर दर्द होना।

लाइम रोग का निदान और उपचार (Lyme Disease Diagnosis and treatment)

लाइम रोग का निदान

लाइम रोग का निदान करना शुरुआती चरण में थोड़ा चुनौती पूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे हो सकते हैं। जैसे – वायरल बुखार, सिरदर्द या थकान जैसे सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर सबसे पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के साथ -साथ हाल ही में रोगी के किसी जंगल या घास वाले इलाके में जाने की जानकारी से लेकर शरीर पर दिखने वाले (Rash) दाने या अन्य लक्षणों के आधार पर प्राथमिक चिकित्सीय जांच करते हैं।

उसके बाद यदि Lyme disease का संदेह होता है, तो इसके बाद पुष्टि के लिए दो मुख्य ब्लड टेस्ट किए जाते हैं —पहला टेस्ट होता है ELISA टेस्ट, जो शरीर में (Borrelia burgdorferi) , बैक्टीरिया के खिलाफ एंटीबॉडी की उपस्थिति की जांच करता है। यदि यह पॉजिटिव आता है, तो दूसरा टेस्ट Western Blot किया जाता है, जो ELISA के नतीजों की पुष्टि करता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये टेस्ट लक्षण शुरू होने के 1 से 2 हफ्ते बाद कराने अधिक सटीक साबित होते हैं क्योंकि तब तक शरीर में एंटीबॉडीज विकसित हो जाती हैं। शरीर को एंटीबॉडीज बनाने में समय लगता है।

लाइम रोग का उपचार

जहाँ तक उपचार की बात है, तो लाइम रोग का इलाज, रोग की अवस्था (stage) और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। अगर रोग को शुरुआती चरण में पकड़ लिया जाए, तो इसे एंटीबायोटिक दवाओं के माध्यम से आसानी से ठीक किया जा सकता है। आमतौर पर डॉक्टर 2 से 4 हफ्तों तक (Doxycycline, Amoxicillin) या अन्य उपयुक्त एंटीबायोटिक्स देते हैं। जो संक्रमण को खत्म करने में प्रभावी होते हैं। अधिकतर लोग इस चरण में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हालांकि,

यदि रोग देर से पकड़ में आये, और यह जोड़ों, हृदय ओर तंत्रिका तंत्र में फैल चुका हो, तो इस स्थिति में इलाज लंबा चल सकता है। और मरीज को अस्पताल की निगरानी (hospital monitoring), भौतिक चिकित्सा (physical therapy) या तंत्रिका संबंधी (neurological support) की आवश्यकता पड़ सकती है। कुछ मरीजों को इलाज के बाद भी महीनों तक थकान, मानसिक भ्रम या दर्द जैसे लक्षण बने रह सकते हैं — जिसे Post-Treatment Lyme Disease Syndrome (PTLDS) कहा जाता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह से दवाओं के साथ-साथ lifestyle support भी जरूरी हो जाता है।

लाइम रोग की रोकथाम और बचाव (Lyme Disease prevention and protection)

लाइम रोग की रोकथाम

लाइम रोग की रोकथाम के लिए, Ticks के काटने से बचना सबसे महत्वपूर्ण है। और outdoor activities के दौरान सतर्क रहना जरूरी होता हैं। यदि आप जंगल, घास-फूस वाले क्षेत्र या पालतू जानवरों के साथ समय बिताते हैं, तो खुद को Ticks से बचाने के लिए कुछ जरूरी कदम अपनाएं। हमेशा पूरी आस्तीन वाले कपड़े और बंद जूते पहनना जरूरी है ताकि आपकी त्वचा ढकी रहे, ओर ticks आपकी त्वचा तक न पहुंच सकें।

इसके अलावा, त्वचा और कपड़ों पर Tick repellent spray (जैसे DEET या Permethrin) का उपयोग करें। और बाहर से घर लौटने के बाद अपने शरीर, सिर, गर्दन, कान के पीछे और घुटनों जैसे हिस्सों की अच्छी तरह जांच करें, क्योंकि ticks अकसर शरीर के इन हिस्सों में चिपक जाते हैं।

लाइम रोग के बचाव

अगर आपको लगता है कि आप किसी tick के संपर्क में आए हैं, या अगर आपको कोई tick शरीर से चिपका हुआ दिखाई दे तो ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं बल्कि उसे तुरंत और सावधानीपूर्वक चिमटी (tweezer) की मदद से सीधा खींचकर निकाल लें। उसे दबाकर या घुमाकर न निकालें, क्योंकि ऐसा करने से संक्रमण आपके शरीर में प्रवेश कर सकता है।

Tick हटाने के बाद उस जगह को साबुन और पानी या एंटीसेप्टिक (antiseptic) से अच्छी तरह साफ करें। अगर tick लंबे समय तक चिपका रहा हो या आपको 3–30 दिन के अंदर rash, बुखार, थकान, या जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर test करवाएं।

अगर आपको लगता है कि आपको लाइम रोग हो गया है, या उससे सम्बन्धित कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर या किसी अन्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क करें और जल्द से जल्द इलाज करवाएँ। जल्दी इलाज कराने से आप अपने आपको गंभीर जटिलताओं से बचा सकते हो।

भारत में लाइम रोग की स्थिति: (Status of Lyme disease in India)

लाइम रोग, जो कि एक टिक के काटने से (बोरेलिया बर्गडॉर्फेरी) नामक बैक्टीरिया के कारण फैलता है। बात करें भारत में इसके फैलने की तो, भारत में इसे दुर्लभ माना जाता हैं।  हालांकि मामलों की सटीक संख्या अज्ञात है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में करीब 3,000 से 5,000 मामले सामने आये है। जिनमें से कई मामलों का पता ही नहीं चल पाता है। Lyme Disease के कुछ मामले भारत के कई राज्यों में पाए गए है, जिनमें हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्य, सिक्किम, कर्नाटक, केरल और हरियाणा शामिल हैं। भारत में लाइम रोग के बारे में जानकारी की कमी है। 

भारत में Lyme रोग को बहुत कम रिपोर्ट किया जाता है, क्योंकि इसके लक्षण जल्दी से पहचान में नहीं आते हैं। और डॉक्टर इसे सामान्य बुखार या वायरल मान लेते हैं। हालाँकि, हिमालय क्षेत्र में टिक पाए जाते हैं, लेकिन भारत में Lyme Disease फैलाने वाले उस विशेष प्रकार के टिक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। बात करें इसके लक्षणों की, तो इसके लक्षण सामान्य बुखार, थकान, दर्द आदि सामान्य रोगों के लक्षणों से मिलते-जुलते हैं, जिससे इसे सही समय पर मरीज और डॉक्टर दोनों के लिए पहचानना मुश्किल हो जाता है।

माना कि भारत में इसे दुर्लभ माना जाता हैं। लेकिन बढ़ती वैश्विक यात्रा और बदलता पर्यावरण भारत में भी लाइम रोग के खतरे को बढ़ा सकता हैं। यद्यपि इस रोग को दुर्लभ माना जाता है, लेकिन फिर भी पूर्वोत्तर, हरियाणा और शिमला जैसे इलाकों से इसके कुछ मामले सामने आए हैं। इन सब को देखते हुए हमें जरूरत हैं। कि हमें इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी हैं। इसके लिए आप इस पोस्ट को पूरा पढ़े।

Q1. लाइम रोग कैसे फैलता है?

यह रोग संक्रमित टिक (tick) के काटने से फैलता है, जो व्यक्ति के शरीर में बोरेलिया बर्गडॉर्फेरी नामक बैक्टीरिया पहुंचा देती हैं। और व्यक्ति लाइम रोग से ग्रसित हो जाता है।

Q2. क्या लाइम रोग का इलाज संभव है?

हां, अगर समय पर रोग की पहचान हो जाए तो एंटीबायोटिक दवाओं से इसका इलाज किया जा सकता है।

Q3. क्या लाइम रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है।

हाँ, आमतौर पर, खाने वाली एंटीबायोटिक्स दवाएं लेने से लाइम रोग दो से चार हफ़्तों में ठीक हो जाता है। इसके आलावा आपको चार हफ़्तों तक नसों के ज़रिए एंटीबायोटिक्स लेने की ज़रूरत पड़ सकती है। हालाँकि, इस बात की कोई पुष्टि नहीं है, कि इलाज कराने के बाद भी लाइम रोग हमेशा के लिए मरीज के शरीर में बना रहता है।

Q4. क्या लाइम रोग जानलेवा हो सकता है?

नहीं, लेकिन अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह दिल, दिमाग और नसों पर गहरा असर डाल सकता है, जो गंभीर हो सकता है। बाकी अभी तक लाइम रोग से मरने की कोई खबर नहीं है।

Note:- यह लेख केवल शिक्षात्मक और सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह या उपचार का विकल्प नहीं है। अगर आपको स्वास्थ्य से जुडी किसी भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। साइट पर उपलब्ध किसी भी जानकारी के आधार पर चिकित्सीय सेवा का उल्लंघन न करें। यदि आप ऐसा करते हैं, तो यह आपकी अपनी जिम्मेदारी होगी।

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